भय के समय, परमेश्वर के इन शक्तिशाली वचनों को थाम लें

मैं यहोवा के पास गया, तब उसने मेरी सुन ली,

और मुझे पूरी रीति से निर्भय किया।

जिन्होंने उसकी ओर दृष्टि की उन्होंने ज्योति पाई;

और उनका मुंह कभी काला न होने पाया।

– भजन संहिता 34:4‭-‬5

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मैं यहोवा के पास गया, तब उसने मेरी सुन ली, और मुझे पूरी रीति से निर्भय किया।

जिन्होंने उसकी ओर दृष्टि की उन्होंने ज्योति पाई; और उनका मुंह कभी काला न होने पाया।

भजन संहिता 34:4‭-‬5

यहोवा परमेश्वर मेरी ज्योति और मेरा उद्धार है;

मैं किस से डरूं?

यहोवा मेरे जीवन का दृढ़ गढ़ ठहरा है,

मैं किस का भय खाऊं?

– भजन संहिता 27:1

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यहोवा परमेश्वर मेरी ज्योति और मेरा उद्धार है; मैं किस से डरूं? यहोवा मेरे जीवन का दृढ़ गढ़ ठहरा है, मैं किस का भय खाऊं?

भजन संहिता 27:1

चाहे मैं घोर अन्धकार से भरी हुई तराई में होकर चलूं,

तौभी हानि से न डरूंगा, क्योंकि तू मेरे साथ रहता है;

तेरे सोंटे और तेरी लाठी से मुझे शान्ति मिलती है॥

– भजन संहिता 23:4

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चाहे मैं घोर अन्धकार से भरी हुई तराई में होकर चलूं, तौभी हानि से न डरूंगा, क्योंकि तू मेरे साथ रहता है; तेरे सोंटे और तेरी लाठी से मुझे शान्ति मिलती है॥

भजन संहिता 23:4

परमेश्वर हमारा शरणस्थान और बल है,

संकट में अति सहज से मिलने वाला सहायक।

इस कारण हम को कोई भय नहीं चाहे पृथ्वी उलट जाए,

और पहाड़ समुद्र के बीच में डाल दिए जाएं;

चाहे समुद्र गरजे और फेन उठाए,

और पहाड़ उसकी बाढ़ से कांप उठें॥

– भजन संहिता 46:1‭-‬3

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परमेश्वर हमारा शरणस्थान और बल है, संकट में अति सहज से मिलने वाला सहायक।

इस कारण हम को कोई भय नहीं चाहे पृथ्वी उलट जाए, और पहाड़ समुद्र के बीच में डाल दिए जाएं;

चाहे समुद्र गरजे और फेन उठाए, और पहाड़ उसकी बाढ़ से कांप उठें॥

भजन संहिता 46:1‭-‬3

फिर उस ने अपने चेलों से कहा; इसलिये मैं तुम से कहता हूं,

अपने प्राण की चिन्ता न करो, कि हम क्या खाएंगे;

न अपने शरीर की कि क्या पहिनेंगे।

क्योंकि भोजन से प्राण, और वस्त्र से शरीर बढ़कर है।

कौवों पर ध्यान दो; वे न बोते हैं, न काटते;

न उन के भण्डार और न खत्ता होता है; तौभी परमेश्वर उन्हें पालता है;

तुम्हारा मूल्य पक्षियों से कहीं अधिक है।

तुम में से ऐसा कौन है,

जो चिन्ता करने से अपनी अवस्था में एक घड़ी भी बढ़ा सकता है?

इसलिये यदि तुम सब से छोटा काम भी नहीं कर सकते,

तो और बातों के लिये क्यों चिन्ता करते हो?

– लूका 12:22-26

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फिर उस ने अपने चेलों से कहा; इसलिये मैं तुम से कहता हूं, अपने प्राण की चिन्ता न करो, कि हम क्या खाएंगे; न अपने शरीर की कि क्या पहिनेंगे।

क्योंकि भोजन से प्राण, और वस्त्र से शरीर बढ़कर है।

कौवों पर ध्यान दो; वे न बोते हैं, न काटते; न उन के भण्डार और न खत्ता होता है; तौभी परमेश्वर उन्हें पालता है; तुम्हारा मूल्य पक्षियों से कहीं अधिक है।

तुम में से ऐसा कौन है, जो चिन्ता करने से अपनी अवस्था में एक घड़ी भी बढ़ा सकता है?

इसलिये यदि तुम सब से छोटा काम भी नहीं कर सकते, तो और बातों के लिये क्यों चिन्ता करते हो?

लूका 12:22-26

तू हियाव बान्ध और दृढ़ हो,

उन से न डर और न भयभीत हो;

क्योंकि तेरे संग चलने वाला तेरा परमेश्वर यहोवा है;

वह तुझ को धोखा न देगा और न छोड़ेगा।

– व्यवस्थाविवरण 31:6

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तू हियाव बान्ध और दृढ़ हो, उन से न डर और न भयभीत हो; क्योंकि तेरे संग चलने वाला तेरा परमेश्वर यहोवा है; वह तुझ को धोखा न देगा और न छोड़ेगा।

व्यवस्थाविवरण 31:6

क्योंकि मैं तेरा परमेश्वर यहोवा, तेरा दहिना हाथ पकड़कर कहूंगा,

मत डर, मैं तेरी सहायता करूंगा॥

हे कीड़े सरीखे याकूब, हे इस्राएल के मनुष्यों, मत डरो!

यहोवा की यह वाणी है, मैं तेरी सहयता करूंगा;

इस्राएल का पवित्र तेरा छुड़ाने वाला है।

– यशायाह 41:13-14

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क्योंकि मैं तेरा परमेश्वर यहोवा, तेरा दहिना हाथ पकड़कर कहूंगा, मत डर, मैं तेरी सहायता करूंगा॥

हे कीड़े सरीखे याकूब, हे इस्राएल के मनुष्यों, मत डरो! यहोवा की यह वाणी है, मैं तेरी सहयता करूंगा; इस्राएल का पवित्र तेरा छुड़ाने वाला है।

यशायाह 41:13-14

मनुष्य का भय खाना फन्दा हो जाता है,

परन्तु जो यहोवा पर भरोसा रखता है

वह ऊंचे स्थान पर चढ़ाया जाता है।

– नीतिवचन 29:25

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मनुष्य का भय खाना फन्दा हो जाता है, परन्तु जो यहोवा पर भरोसा रखता है वह ऊंचे स्थान पर चढ़ाया जाता है।

नीतिवचन 29:25

यहोवा के डरवैयों के चारों ओर

उसका दूत छावनी किए हुए उन को बचाता है।

– भजन संहिता 34:7

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यहोवा के डरवैयों के चारों ओर उसका दूत छावनी किए हुए उन को बचाता है।

भजन संहिता 34:7

क्योंकि परमेश्वर ने हमें भय की नहीं

पर सामर्थ, और प्रेम, और संयम की आत्मा दी है।

– 2 तीमुथियुस 1:7

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क्योंकि परमेश्वर ने हमें भय की नहीं पर सामर्थ, और प्रेम, और संयम की आत्मा दी है।

2 तीमुथियुस 1:7

प्रेम में भय नहीं होता,

वरन सिद्ध प्रेम भय को दूर कर देता है,

क्योंकि भय से कष्ट होता है,

और जो भय करता है,

वह प्रेम में सिद्ध नहीं हुआ।

– 1 यूहन्ना 4:18

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प्रेम में भय नहीं होता, वरन सिद्ध प्रेम भय को दूर कर देता है, क्योंकि भय से कष्ट होता है, और जो भय करता है, वह प्रेम में सिद्ध नहीं हुआ।

1 यूहन्ना 4:18

उदास मन दब जाता है,

परन्तु भली बात से वह आनन्दित होता है।

– नीतिवचन 12:25

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उदास मन दब जाता है, परन्तु भली बात से वह आनन्दित होता है।

नीतिवचन 12:25

जो बात वे कह रहे थे,

उस को यीशु ने अनसुनी करके,

आराधनालय के सरदार से कहा;

मत डर; केवल विश्वास रख।

– मरकुस 5:36

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जो बात वे कह रहे थे, उस को यीशु ने अनसुनी करके, आराधनालय के सरदार से कहा; मत डर; केवल विश्वास रख।

मरकुस 5:36

क्योंकि मैं निश्चय जानता हूं,

कि न मृत्यु, न जीवन, न स्वर्गदूत, न प्रधानताएं,

न वर्तमान, न भविष्य, न सामर्थ, न ऊंचाई,

न गहिराई और न कोई और सृष्टि,

हमें परमेश्वर के प्रेम से, जो हमारे प्रभु मसीह यीशु में है,

अलग कर सकेगी॥

– रोमियो 8:38-39

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क्योंकि मैं निश्चय जानता हूं, कि न मृत्यु, न जीवन, न स्वर्गदूत, न प्रधानताएं, न वर्तमान, न भविष्य, न सामर्थ, न ऊंचाई,

न गहिराई और न कोई और सृष्टि, हमें परमेश्वर के प्रेम से, जो हमारे प्रभु मसीह यीशु में है, अलग कर सकेगी॥रहे थे, उस को यीशु ने अनसुनी करके, आराधनालय के सरदार से कहा; मत डर; केवल विश्वास रख।

रोमियो 8:38-39

तेरा परमेश्वर यहोवा तेरे बीच में है,

वह उद्धार करने में पराक्रमी है;

वह तेरे कारण आनन्द से मगन होगा,

वह अपने प्रेम के मारे चुपका रहेगा;

फिर ऊंचे स्वर से गाता हुआ तेरे कारण मगन होगा॥

– सपन्याह 3:17

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तेरा परमेश्वर यहोवा तेरे बीच में है, वह उद्धार करने में पराक्रमी है; वह तेरे कारण आनन्द से मगन होगा, वह अपने प्रेम के मारे चुपका रहेगा; फिर ऊंचे स्वर से गाता हुआ तेरे कारण मगन होगा॥

सपन्याह 3:17

1 जो परमप्रधान के छाए हुए स्थान में बैठा रहे, वह सर्वशक्तिमान की छाया में ठिकाना पाएगा।

मैं यहोवा के विषय कहूंगा, कि वह मेरा शरणस्थान और गढ़ है; वह मेरा परमेश्वर है, मैं उस पर भरोसा रखूंगा।

वह तो तुझे बहेलिये के जाल से, और महामारी से बचाएगा;

वह तुझे अपने पंखों की आड़ में ले लेगा, और तू उसके पैरों के नीचे शरण पाएगा; उसकी सच्चाई तेरे लिये ढाल और झिलम ठहरेगी।

तू न रात के भय से डरेगा, और न उस तीर से जो दिन को उड़ता है,

न उस मरी से जो अन्धेरे में फैलती है, और न उस महारोग से जो दिन दुपहरी में उजाड़ता है॥

तेरे निकट हजार, और तेरी दाहिनी ओर दस हजार गिरेंगे; परन्तु वह तेरे पास न आएगा।

परन्तु तू अपनी आंखों की दृष्टि करेगा और दुष्टों के अन्त को देखेगा॥

हे यहोवा, तू मेरा शरण स्थान ठहरा है। तू ने जो परमप्रधान को अपना धाम मान लिया है,

10 इसलिये कोई विपत्ति तुझ पर न पड़ेगी, न कोई दु:ख तेरे डेरे के निकट आएगा॥

11 क्योंकि वह अपने दूतों को तेरे निमित्त आज्ञा देगा, कि जहां कहीं तू जाए वे तेरी रक्षा करें।

12 वे तुझ को हाथों हाथ उठा लेंगे, ऐसा न हो कि तेरे पांवों में पत्थर से ठेस लगे।

13 तू सिंह और नाग को कुचलेगा, तू जवान सिंह और अजगर को लताड़ेगा।

14 उसने जो मुझ से स्नेह किया है, इसलिये मैं उसको छुड़ाऊंगा; मैं उसको ऊंचे स्थान पर रखूंगा, क्योंकि उसने मेरे नाम को जान लिया है।

15 जब वह मुझ को पुकारे, तब मैं उसकी सुनूंगा; संकट में मैं उसके संग रहूंगा, मैं उसको बचा कर उसकी महिमा बढ़ाऊंगा।

16 मैं उसको दीर्घायु से तृप्त करूंगा, और अपने किए हुए उद्धार का दर्शन दिखाऊंगा॥ बीच में है, वह उद्धार करने में पराक्रमी है; वह तेरे कारण आनन्द से मगन होगा, वह अपने प्रेम के मारे चुपका रहेगा; फिर ऊंचे स्वर से गाता हुआ तेरे कारण मगन होगा॥

– भजन संहिता 91 : 1-16

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1 जो परमप्रधान के छाए हुए स्थान में बैठा रहे, वह सर्वशक्तिमान की छाया में ठिकाना पाएगा।

मैं यहोवा के विषय कहूंगा, कि वह मेरा शरणस्थान और गढ़ है; वह मेरा परमेश्वर है, मैं उस पर भरोसा रखूंगा।

वह तो तुझे बहेलिये के जाल से, और महामारी से बचाएगा;

वह तुझे अपने पंखों की आड़ में ले लेगा, और तू उसके पैरों के नीचे शरण पाएगा; उसकी सच्चाई तेरे लिये ढाल और झिलम ठहरेगी।

तू न रात के भय से डरेगा, और न उस तीर से जो दिन को उड़ता है,

न उस मरी से जो अन्धेरे में फैलती है, और न उस महारोग से जो दिन दुपहरी में उजाड़ता है॥

तेरे निकट हजार, और तेरी दाहिनी ओर दस हजार गिरेंगे; परन्तु वह तेरे पास न आएगा।

परन्तु तू अपनी आंखों की दृष्टि करेगा और दुष्टों के अन्त को देखेगा॥

हे यहोवा, तू मेरा शरण स्थान ठहरा है। तू ने जो परमप्रधान को अपना धाम मान लिया है,

10 इसलिये कोई विपत्ति तुझ पर न पड़ेगी, न कोई दु:ख तेरे डेरे के निकट आएगा॥

11 क्योंकि वह अपने दूतों को तेरे निमित्त आज्ञा देगा, कि जहां कहीं तू जाए वे तेरी रक्षा करें।

12 वे तुझ को हाथों हाथ उठा लेंगे, ऐसा न हो कि तेरे पांवों में पत्थर से ठेस लगे।

13 तू सिंह और नाग को कुचलेगा, तू जवान सिंह और अजगर को लताड़ेगा।

14 उसने जो मुझ से स्नेह किया है, इसलिये मैं उसको छुड़ाऊंगा; मैं उसको ऊंचे स्थान पर रखूंगा, क्योंकि उसने मेरे नाम को जान लिया है।

15 जब वह मुझ को पुकारे, तब मैं उसकी सुनूंगा; संकट में मैं उसके संग रहूंगा, मैं उसको बचा कर उसकी महिमा बढ़ाऊंगा।

16 मैं उसको दीर्घायु से तृप्त करूंगा, और अपने किए हुए उद्धार का दर्शन दिखाऊंगा॥ बीच में है, वह उद्धार करने में पराक्रमी है; वह तेरे कारण आनन्द से मगन होगा, वह अपने प्रेम के मारे चुपका रहेगा; फिर ऊंचे स्वर से गाता हुआ तेरे कारण मगन होगा॥

भजन संहिता 91 : 1-16

Published by Yeshu.One

Yeshu.One की कोशिश है परमेश्वर के वचन को जीवन का हिस्सा बनाना।

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