आज का प्रोत्साहन ~ 01-02-2022

हर दिन की शुरुआत परमेश्वर के प्रोत्साहन के साथ

अभी कुछ हफ्ते पहले, हमने क्रिसमस मनाया – जिसका अर्थ है यीशु मसीह का जन्म। यीशु मसीह का जन्म एक विशेष कारण से हुआ था। वह स्वर्ग छोड़कर किसी विशेष व्यक्ति के लिए इस पृथ्वी पर आये थे। और वह खास व्यक्ति कोई और नहीं बल्कि आप और हम हैं। उनका जमन एक विशेष कार्य के लिए हुआ था। और वो विशेष कार्य था – हमें हमारे पापों से बचाना। हमारा उद्धार करना। इसलिए वह हमारा उद्धारकर्ता है।

याद रखें, परमेश्वर का वचन यो कहता है –

और किसी दूसरे के द्वारा उद्धार नहीं; क्योंकि स्वर्ग के नीचे मनुष्यों में और कोई दूसरा नाम नहीं दिया गया, जिस के द्वारा हम उद्धार पा सकें॥

– प्रेरितों के काम 4:12

आज के लिए बाइबिल से जुडी अद्भुत जानकारी

मत्ती रचित सुसमाचार हमें क्या बताती है?

मत्ती रचित सुसमाचार” के बारे में यूँ कहा जाता है की इसे एक यहूदी ने दूसरे यहूदियों के लिए लिखा है। इस पुस्तक में पुराने नियम के माध्यम से यीशु मसीह के जन्म और जीवन के बारे में लिखा गया है। हम देख पाएंगे की कैसे मूसा की व्यवस्था में, भविष्यवक्ताओं और अन्य परिचित यहूदियों के द्वारा – कैसे यीशु मसीह के जन्म के बारे में भविष्वाणी की गयी थी। और वो सब कैसे शब्द ब शब्द पूरा भी होता है।

यीशु मसीह हमारे मसीहा हैं। मत्ती रचित सुसमाचार में इस चीज को ज़ोर देकर लिखा गया –

यीशु मसीह


परमेश्वर का पुत्र है।
राजाओं का राजा है ।
हमारा उद्धारकर्ता है

जिसका हमें वायदा किया गया था।

मत्ती रचित सुसाचर का सारांश

  • यीशु मसीह का जन्म और महत्त्व (मत्ती 1-2)
  • यीशु मसीह की शिक्षा और सेवकाई (मत्ती 3-7)
  • यीशु मसीह के आश्चर्यकर्म (मत्ती 8–9)
  • यीशु ने अपने चेलों को भेजा (मत्ती 10)
  • यीशु को अस्वीकार किया गया (मत्ती 11-12)
  • स्वर्ग के राज्य के दृष्टान्त (मत्ती 13:1-52)
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मत्ती रचित सुसाचर का सारांश

  • यीशु को परमेश्वर के पुत्र के रूप में प्रकट किया जाना (मत्ती 13:53-17:27)
  • परमेश्वर के राज्य में कौन महान है? (मत्ती 18)
  • लोग यीशु के शासन को ग्रहण करने के लिए संघर्ष करते हैं (मत्ती 19–23)
  • आने वाले राज्य में न्याय की शिक्षाएं (मत्ती 24-25)
  • यीशु का बलिदान, विजय और अपने शिष्यों को आज्ञा (मत्ती 26-27)
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आज के वचन पर आधारित एक गीत


उठ और प्रकाशमान हो – वचन पर आधारित “आज के लिए प्रोत्साहन के शब्द ”

विश्वास अदृश्य को देखता है,

अविश्वसनीय में विश्वास करता है,

असंभव को प्राप्त करता है।

अखबार क्या कहती है? आपके मालिक (boss) क्या कहते हैं? आपकी बड़ी बड़ी शिक्षा क्या कहती है? आपका विश्लेषण क्या कहता है? यह मायने नहीं रखता।

मायने यह रखता है कि परमेश्वर क्या कहता है और परमेश्वर का वचन हमसे क्या कहता है?

याद रखें कि परमेश्वर का वचन आपसे और मुझसे स्पष्ट स्पष्ट मत्ती 19:6 में यों कहता है –

यीशु ने उन की ओर देखकर कहा,

मनुष्यों से तो यह नहीं हो सकता,

परन्तु परमेश्वर से सब कुछ हो सकता है।

मत्ती 19:6

यीशु के पीछे, मैं चलने लगा। ना लौटूँगा। ना लौटूँगाआज के लिए एक आशीषित कथन

“यीशु मसीह के अलावा, हम नहीं जानते कि हमारा जीवन क्या है, न हमारी मृत्यु, न परमेश्वर, न ही खुद को।”

– ब्लेज़ पास्कल

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अगर गिलास पहले से भरा हो, तो उसमें और कुछ नहीं भरा जा सकता। यदि हम पहले से ही संसार के विचारों से, संसार की वस्तुओं से भरे हुए हो। तो हम आगे कभी भी परमेश्वर के अभिषेक और परमेश्वर के वचन से नहीं भरे जा सकते हैं। आईये, आज खुद को खाली करें। परमेश्वर और उसके वचन को अपने जीवन में भरने दें। तब, आप उसके कार्यों को अपने जीवनों में महिमामय रूप से प्रकट होते हुए देखने पाएंगे।


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Published by Yeshu.One

Yeshu.One की कोशिश है परमेश्वर के वचन को जीवन का हिस्सा बनाना।

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