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Yeshu.One की कोशिश है परमेश्वर के वचन को जीवन का हिस्सा बनाना।

7 और तू इन्हें अपने बाल-बच्चों को समझाकर सिखाया करना, और घर में बैठे, मार्ग पर चलते, लेटते, उठते, इनकी चर्चा किया करना।
8 और इन्हें अपने हाथ पर चिन्हानी करके बान्धना, और ये तेरी आंखों के बीच टीके का काम दें।
9 और इन्हें अपने अपने घर के चौखट की बाजुओं और अपने फाटकों पर लिखना॥
10 और जब तेरा परमेश्वर यहोवा तुझे उस देश में पहुंचाए जिसके विषय में उसने इब्राहीम, इसहाक, और याकूब नाम, तेरे पूर्वजों से तुझे देने की शपथ खाई, और जब वह तुझ को बड़े बड़े और अच्छे नगर, जो तू ने नहीं बनाए,
11 और अच्छे अच्छे पदार्थों से भरे हुए घर, जो तू ने नहीं भरे, और खुदे हुए कुंए, जो तू ने नहीं खोदे, और दाख की बारियां और जलपाई के वृक्ष, जो तू ने नहीं लगाए, ये सब वस्तुएं जब वह दे, और तू खाके तृप्त हो.

  • व्यवस्थाविवरण 6 : 7 -11

लोग परमेश्वर के वचन के बारे में क्या कहते हैं

कोई भी कभी भी पवित्रशास्त्र से आगे नहीं बढ़ता; पवित्रशास्त्र हमारे जीवन के वर्षों को चौड़ी और गहरा करता है।

Charles Spurgeon

बाइबल मेरे जीवन की पुस्तक है। यह वह पुस्तक है, जिसके साथ मैं रह रहा हूं, जिस पुस्तक से मैं जीवित हूं, वह पुस्तक जिसके द्वारा मैं मरना चाहता हूं।

N. T. Wright

अधिकांश लोग पवित्रशास्त्र के उन अंशों से परेशान होते हैं जिन्हें वे नहीं समझते हैं। लेकिन वे अंश जो मुझे परेशान करते हैं, वे हैं जिन्हें मैं समझता हूं।

Mark Twain


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